Wednesday, July 15

वर्ष 2025 विश्वप्रसिद्ध पितृपक्ष मेला कई नए आयामों को जोड़ते हुए नई इतिहास लिख गया। एक तरफ जहां देश के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गया जी में आकर पिंडदान कीं। वहीं बड़ेउद्योपतियों में से एक मुकेश अंबानी सपरिवार आकर पिंडदान किए। आस्था और श्रद्धा के महासंगम पितृपक्ष मेला 2025 कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। जिसका समापन 21 सितम्बर को हो गया। समापन समारोह में सहकारिता विभाग, बिहार सरकार के मंत्री डॉ. प्रेम कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। जिन्होंने राज्य सरकार, केंद्र सरकार, जिला प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़े लोगों को मेले को ऐतिहासिक बनाने के आभार प्रकट किया। समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि पितृपक्ष मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारत की सनातन संस्कृति और परंपरा का अद्वितीय प्रतीक है। यह मेला गया जी की आस्था को विश्व स्तर पर पहचान दिलाता है और यहां आने वाले लाखों श्रद्धालु अपने पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। मंत्री ने कहा कि मेला को सफल बनाने में जिला प्रशासन, धार्मिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं एवं स्थानीय जनता का अतुलनीय योगदान रहा। मंत्री ने अंत में कहा मैं बिहार सरकार की ओर से गया जी के वासियों, प्रशासनिक पदाधिकारियों, धार्मिक व सामाजिक संगठनों को धन्यवाद देता हूँ, जिनकी मेहनत और निष्ठा के कारण पितृपक्ष मेला महासंगम 2025 सफल और यादगार बन सका।’

30 लाख लोग इस बार मेले में आए

जिलापदधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि इस वर्ष पितृपक्ष मेला के दौरान देश विदेश से करीब 30 लाख श्रद्धालु आए। जो बेहतर अनुभव लेकर यहां से लौटे हैं। ये हमारा सौभाग्य है। श्रद्धालुओं को गंगाजल भेंट किया गया। टेंट सिटी, कंट्रोल रूम, वन नेशन, वन राशन का भी लोगों ने लाभ उठाया। कॉल सेंटर, दिव्यांगजनों, वृद्ध महिला व पुरुष श्रद्धालुओं को दी गई सेवाओं का भी उन्होंने जिक्र करते हुए हर दृष्टिकोण से मेला सफल बनाने के लिए डीएम ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया।

यातायात व्यवस्था और पुलिस का सहयोग बेहतर रहा

यातयात व्यवस्थाओं की भी तारीफ लोग करते सुने गए। सुरक्षा व्यवस्था, मेला क्षेत्र के अलावा जगह जगह पर पुलिस के शिविरों में तैनात किए पदाधिकारी एवं जवानों ने भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन बेहतर तरीके से किया। विशेषकर महिला पुलिसकर्मी की सेवाएं उत्कृष्ट रही। स्वास्थ्य शिविरों का भी लोगों ने लाभ उठाया। भीड़ प्रबंधन और नियंत्रण एक बड़ी जिम्मेदारी थी, जिसे बेहतर तरीके से निभाया गया।

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