Wednesday, July 15

गया। नगर निगम की डिप्टी मेयर चिंता देवी ने अपने सम्मान की लड़ाई में एक ऐसा कदम उठाया, जिसने सभी का ध्यान खींचा। नगर निगम के अफसरों और जनप्रतिनिधियों से बार-बार उपेक्षा के बाद, सोमवार को वे सीधे नगर निगम दफ्तर के बाहर सब्जी मंडी में पहुंचीं और जमीन पर बैठकर लौकी और कोहड़ा बेचने लगीं। उनकी नाराजगी का यह अनूठा प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया।

अपमान के खिलाफ अनोखा विरोध

चिंता देवी का कहना है कि उन्हें न तो नगर निगम की बैठकों की सूचना दी जाती है और न ही किसी योजना में शामिल किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति से होने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। “जनता ने मुझे वोट देकर यहां भेजा, लेकिन मेरी बात कोई नहीं सुनता। अब मेरे पास विकल्प ही क्या बचा है?” चिंता देवी ने कहा।

आर्थिक तंगी भी बनी वजह

डिप्टी मेयर ने अपनी आर्थिक तंगी का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बेटी की शादी के लिए 3 लाख रुपये का कर्ज लिया था, जिसे चुकाने में उन्हें भारी दिक्कत हो रही है। “अगर मान-सम्मान नहीं मिलेगा, तो घर चलाने के लिए सब्जी बेचनी पड़ेगी,” उन्होंने कहा। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि वे पिछले एक महीने से सब्जी बेच रही हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार, यह उनका पहला दिन था। फिर भी, उनके इस कदम को कई लोगों का समर्थन मिला, और मंडी में उनकी सब्जियां खरीदने वालों की भीड़ जुट गई।

राजनीति या मजबूरी?

डिप्टी मेयर का यह अनोखा विरोध भले ही चर्चा में हो, लेकिन यह नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है। क्या राजनीति में जातिगत भेदभाव और आर्थिक दबाव के कारण निर्वाचित प्रतिनिधियों को ऐसे कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा?

* – First Voice*
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