पवई (मध्यप्रदेश): त्योहार केवल पकवानों और रंगों का नाम नहीं, बल्कि अपनों के साथ खुशियाँ साझा करने का अवसर है। इसी भावना को चरितार्थ करते हुए पवई विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत कृष्णगढ़ में इस वर्ष होली का एक अलग ही स्वरूप देखने को मिला। यहाँ कौशल्या ह्यूमैनिटी फाउंडेशन (KHF) द्वारा आयोजित ‘सेवा अभियान’ ने उत्सव को सामाजिक समरसता की एक नई परिभाषा दी।
सिर्फ रंग नहीं, सेवा और संवेदना का उत्सव

अक्सर त्योहारों की चकाचौंध में समाज का वह वर्ग पीछे छूट जाता है, जो अभावों में जीवन जी रहा है। इसी खाई को पाटने के लिए KHF की टीम कृष्णगढ़ के बीच पहुँची। अभियान के दौरान गांव के बच्चों, माताओं, बहनों और बुजुर्गों के साथ न केवल गुलाल खेला गया, बल्कि उनकी जरूरतों का भी ख्याल रखा गया।

फाउंडेशन की ओर से जरूरतमंद परिवारों को:
- मिठाई और पकवान वितरित किए गए।
- बच्चों के लिए पिचकारी, रंग और गुब्बारे बांटे गए।
- स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मास्क का वितरण भी किया गया।
बुजुर्गों का आशीष और बच्चों की किलकारियां
कार्यक्रम का सबसे भावुक पल वह था जब उपहार पाकर छोटे-छोटे बच्चों के चेहरे खिल उठे। बुजुर्गों ने फाउंडेशन की टीम के सिर पर हाथ रखकर उज्जवल भविष्य का आशीर्वाद दिया। गांव की गलियों में जब रंग और गुलाल उड़ा, तो उसमें ऊंच-नीच या अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं था; वहां सिर्फ मानवीय संवेदनाएं थीं।
“सेवा ही सच्चा उत्सव है”
इस पूरे अभियान का नेतृत्व समाज सेविका और KHF की संस्थापक अध्यक्ष अर्चना सिंगरौल ने किया। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उन्होंने एक प्रेरणादायक बात कही:”त्योहार मनाने का असली अर्थ तभी सार्थक है, जब समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की खुशियों में भी हमारी हिस्सेदारी हो। किसी जरूरतमंद के चेहरे पर आने वाली मुस्कान ही हमारे कार्यों की सबसे बड़ी सफलता और ईश्वर की सच्ची इबादत है।”
एक मिसाल बना यह आयोजन
कृष्णगढ़ में हुआ यह आयोजन महज एक वितरण कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाज के संपन्न वर्ग के लिए एक संदेश था। KHF ने यह साबित किया कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो छोटे-छोटे प्रयासों से पूरे गांव का माहौल बदला जा सकता है। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी कोशिशें आपसी भाईचारे को और मजबूत करती हैं।














