
फतेहपुर (गया)। फतेहपुर प्रखंड में प्रमुख और उपप्रमुख के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को अंततः प्रखंड प्रशासन द्वारा खारिज कर दिया गया। प्रखंड कार्यालय में आयोजित बैठक में आवश्यक संख्या में पंचायत समिति सदस्यों की उपस्थिति नहीं होने के कारण अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा संभव नहीं हो सकी।जानकारी के अनुसार पंचायत समिति के कुल निर्वाचित सदस्यों की संख्या 25 है। नियम के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए कम-से-कम दो तिहाई सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होती है। इस आधार पर बैठक में 17 सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक थी, जबकि बैठक में कुल 13 सदस्य ही उपस्थित हो पाए। इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी शशिभूषण साहू ने बताया कि एस०एल०पी० सं०–2168/2025 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 10 फरवरी 2026 को दिए गए निर्देशों के आलोक में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बैठक में कुल निर्वाचित सदस्यों के कम-से-कम दो तिहाई सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। उन्होंने कहा कि यदि बैठक में दो तिहाई सदस्य उपस्थित नहीं होते हैं, तो उस स्थिति में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा नहीं की जा सकती और इसे असफल माना जाएगा। वहीं इस फैसले के बाद बैठक में मौजूद पंचायत समिति सदस्यों में नाराजगी देखी गई। कई सदस्यों ने बीडीओ के निर्णय पर सवाल उठाते हुए आपत्ति जताई। इस दौरान पूर्व उपप्रमुख दिलीप यादव ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि बैठक में जिस पत्र (लेटर) का हवाला देकर अविश्वास प्रस्ताव को खारिज किया गया, वह पत्र बिहार सरकार का नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश से संबंधित बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा है तो बिहार के नियमों के बजाय दूसरे राज्य के पत्र के आधार पर निर्णय लेना उचित नहीं है।
पूर्व उपप्रमुख ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि पंचायत समिति सदस्यों के अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। इस घटना के बाद प्रखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है और आगे इस मामले को लेकर विवाद बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।












