
फतेहपुर: बिहार में पैक्स (प्राथमिक कृषि साख समिति) के कामकाज को पारदर्शी बनाने के दावों के बीच फतेहपुर प्रखंड की नगवां पंचायत में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नगवां पैक्स अध्यक्ष पर आरोप लगा है कि उन्होंने नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए अपने सगे पुत्र को ही पैक्स प्रबंधक के पद पर नियुक्त कर दिया है। इस मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उन्होंने जिलाधिकारी (DM) से इसकी लिखित शिकायत की है।
गुप्त तरीके से बहाली का आरोप
नगवां पंचायत निवासी अशोक कुमार अकेला, मन्नू यादव, लाल बाबू (उप मुखिया प्रतिनिधि), विजय राजवंशी (सरपंच प्रतिनिधि), सरजू यादव और संतोष यादव समेत दर्जनों ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी को दिए आवेदन में गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पैक्स अध्यक्ष ने बिना किसी सार्वजनिक सूचना या समाचार पत्रों में विज्ञापन निकाले, अत्यंत गुप्त तरीके से फर्जी बैठक का प्रस्ताव तैयार किया और अपने पुत्र मुकेश कुमार को प्रबंधक पद पर बहाल कर दिया।
‘गबन और लूट की मंशा’: ग्रामीणों ने उठाए सवाल
शिकायतकर्ता अशोक कुमार अकेला ने आरोप लगाया कि यह बहाली पूरी तरह से एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा, “पैक्स अध्यक्ष ने अपने बेटे को इस पद पर इसलिए बैठाया है ताकि भविष्य में समिति के फंड में गबन, घोटाला और लूट की जा सके।” ग्रामीणों का तर्क है कि सरकारी और अर्ध-सरकारी पदों पर इस तरह की ‘परिवारवाद’ वाली नियुक्तियां न केवल अनैतिक हैं, बल्कि कानूनी रूप से भी अवैध हैं।
क्या कहती है नियमावली?
आवेदन में पैक्स कर्मचारी आदर्श सेवा नियमावली, 2023 का हवाला देते हुए बताया गया है कि:
नियमावली की कंडिका 07 (ड़)(b)(d) स्पष्ट रूप से ‘परिवार’ को परिभाषित करती है।
नियमों के अनुसार, पैक्स अध्यक्ष का कोई भी निकटतम पारिवारिक सदस्य (निजी परिवार) उसी पैक्स में प्रबंधक या अन्य कर्मचारी के पद पर नियुक्त नहीं हो सकता है।
ऐसी नियुक्तियां ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) के दायरे में आती हैं।
प्रशासन की कार्रवाई
इस मामले को जिला पदाधिकारी ने काफी गंभीरता से लिया है। ग्रामीणों की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए DM ने बताया कि आवेदन प्राप्त हो चुका है। उन्होंने जिला सहकारिता पदाधिकारी (DCO) को निर्देशित किया है कि मामले की गहन जांच की जाए और यदि अनियमितता पाई जाती है, तो अविलंब सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।








