
गया जिले के बाराचट्टी प्रखंड अंतर्गत जयगीर पंचायत के सोमिया गांव से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। महज एक हफ्ते के भीतर मांझी समाज के एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर से बेरोजगारी और गरीबी की मार झेल रहे ग्रामीण परिवारों की बदहाली को उजागर कर दिया है।है।
रोजी-रोटी की तलाश में राजस्थान गया था महेश मांझी
मृतक महेश मांझी (उम्र लगभग 25 वर्ष), पिता राजेंद्र मांझी, कुछ महीने पहले ही रोजगार की तलाश में राजस्थान गया था। महेश की शादी करीब 4 साल पहले लालो देवी से हुई थी और परिवार में एक मासूम बच्चा भी है। गांव में रोजगार के अवसर न मिलने के कारण वह अपने गर्भवती पत्नी, पिता और बच्चे के भरण-पोषण के लिए दूर-दराज के राज्य में मजदूरी करने को मजबूर था।लेकिन 23 अगस्त को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उसका शव तक गांव नहीं लाया जा सका।
बेटे की मौत का सदमा झेल न सके पिता
बेटे की मौत की खबर सुनने के बाद पिता राजेंद्र मांझी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। सदमे को वह बर्दाश्त नहीं कर सके और महज दो दिन बाद, 26 अगस्त को उनकी भी मौत हो गई।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
अब परिवार की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। न रहने के लिए पक्का घर है और न ही खाने को पर्याप्त अनाज। गर्भवती लालो देवी बार-बार बेहोश हो जाती हैं और रो-रोकर सिर्फ भगवान को ही दोषी ठहराती हैं।
गांव में एक और मौत, प्रशासन से मदद की गुहार
इसी गांव के जीतेंद्र भुइयां, पिता देवलाल मांझी की भी कुछ दिन पहले मौत हो चुकी है। बताया जाता है कि यह परिवार भी उन्हीं से जुड़ा हुआ है। तीन मौतों के बाद पूरा गांव शोक में डूबा है और लोग सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।










